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भारत का संविधान केवल नियमों की व्याख्या नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती से स्थापित करता है-रवींद्र नाथ महतो 

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड विधान सभा सचिवालय में विधि निर्माण की प्रक्रिया एवं कार्यपालिका के दायित्व विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण सह सेमिनार आज समापन हुआ। समापन सत्र में अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने अपने संबोधन में कहा कि यह प्रशिक्षण सत्र विधायिका और कार्यपालिका के बीच समन्वय को और अधिक सुदृढ़ करने में सफल साबित होगा। भारतीय शासन व्यवस्था में सिविल सेवा की संरचना मूल रूप से ब्रिटिश शासन के अनुरूप होने के बावजूद भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली में जिम्मेदारियां पृथक है और सिविल सेवकों से लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है परंतु यह समझ लेना बहुत बड़ी भूल होगी कि सिविल सेवकों का कोई उत्तरदायित्व विधायिका के प्रति नहीं है।


भारत का संविधान केवल नियमों की व्याख्या नहीं करता 
 रवींद्र नाथ महतो ने कहा कि विधानसभा के पटल पर सदस्यों के प्रश्न का उत्तर मंत्रियों द्वारा दिए जाता है। जिसे पदाधिकारियों द्वारा ही तैयार किया जाता है। संसदीय लोकतंत्र में समिति व्यवस्था के माध्यम से विधायिका कार्यपालिका के कार्य पर निगरानी रखती है। भारत का संविधान केवल नियमों की व्याख्या नहीं करता बल्कि लोकतांत्रिक प्रणाली को मजबूती से स्थापित भी करता है,जमीदारी उन्मूलन,संपत्ति-संबंधों में बदलाव तथा वंचित नागरिकों को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में विशेष अवसर प्रदान करने जैसे उपाय भी ऐसे लोकतांत्रिक भावनाओं  को इंगित करते हैं।


 

आज इनलोगों ने रखा वक्तव्य

आज के कार्यशाला में संसाधन पुरुष के रूप में "विधायिका एवं कार्यपालिका के बीच संबंध" पर सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी, महानिदेशक इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन नई दिल्ली ने अपना वक्तव्य रखा। साथ ही"विधि निर्माण की प्रक्रिया प्रारुपण,पुर:स्थापन, पारण एवं पुनर्विचार, प्रत्यायोजित विधान" विषय पर चक्षु राय पीआरएस लेजिस्लेटिव  रिसर्च,नई दिल्ली "संसदीय विशेषाधिकार विषय" पर मिरांडा इंगुदम,निदेशक राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग।"समिति व्यवस्था" पर मिथिलेश कुमार मिश्र संयुक्त सचिव, झारखंड विधानसभा के द्वारा कार्यशाला में अपने वक्तव्य रखे गए।


इनको मिला प्रमाण पत्र 
इसके साथ ही रबीन्द्र नाथ महतो आज के समापन सत्र में प्रमाण पत्र दिए। उन्होंने संजय बिहारी अम्बष्ठ (भा०प्र०से०)मनमोहन प्रसाद (भा०प्र०से०), सतीश चंद्र चौधरी (भा०प्र०से०), रवि रंजन कु०विक्रम (भा०प्र०से०) अमित प्रकाश (भा०प्र०से०),सुनील कुमार सिंह (झ०प्र०से०),ध्रुव प्रसाद (झ०प्र०से०),को अपने कर कमलों से प्रशिक्षण लेने के लिए प्रमाण पत्र दिए। शेष कार्यशाला में भाग लेने वाले सभी पदाधिकारियों को सैयद जावेद हैदर, प्रभारी सचिव, झारखंड विधान सभा  द्वारा प्रमाण पत्र दिए गए।


प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पदाधिकारियों ने जताया आभार
 प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले पदाधिकारियों ने समापन सत्र में अपने उद्गार व्यक्त किए। सुनील कुमार सिंह (झ०प्र०से०) ने कार्यशाला के अनुभव को व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड विधानसभा द्वारा ऐसे कार्यशाला का आयोजन भविष्य में भी किया जाना चाहिए। इस तीन दिवसीय कार्यशाला में संसाधन पुरुषों से जो सीखने को प्राप्त हुआ,वे हमारे कार्यों के निष्पादन एवं दायित्व के निर्वाह के लिए काफी प्रासंगिक होगा।

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